देश में कोरोना संक्रमण से हुयी मृतकों की संख्या को लेकर स्वास्थ्य मंत्री हर्ष वर्धन ने कही बड़ी बात

देश में कोरोना कहर अपने चरम सीमा पर कहर बरपा रहा था. कोरोना की दूसरी लहर ने बहुत अधिक तीव्रता के साथ संक्रमण को फैला रहा था. मरीजों की संख्या बढ़ती ही जा रही थी. कोरोना का संकट एक समय ऐसा छाया हुआ था कि प्रतिदिन कोरोना संक्रमण के मरीजों की संख्या 4 लाख के पार आने लगी थी. देश के लिए उस समय का सामना करना बहुत ही कठिन था. इतना ही नहीं जिस तरह से कोरोना का संक्रमण बढ़ रहा था. उतनी ही तेजी से कोरोना के संक्रमितों का भी आकड़ा बढ़ता ही जा रहा था. लेकिन अभी कुछ दिनों से अच्छी खबर आ रही है कि कोरोना का कहर थमता जा रहा है.

आपको बता दें कि इस बीच कई राज्यों ने कोरोना से होने वाली मृतकों की संख्या में पुराने आकड़ें को भी जोड़ा है. ऐसा करने से कई प्रकार के सवाल सामने नजर आने लगे हैं. बता दें कि प्रसिद्ध इंटरनेशनल मैग्जीन द इकोनॉमिक्ट में प्रकाशित लेख में भारत में कोरोना वायरस से हुई मृतकों के आकड़े को लेकर बड़ा दावा किया गया है कि मौत का आकड़ा 5 से 7 गुना ज्यादा हो सकता है. अमेरिका की वर्जीनिया कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी के क्रिस्टोफर लेफलर के रिसर्च के आधार पर प्रकाशित लेख में दावा किया गया है. कि भारत में जितनी मृतकों के आकड़ें को दिखाया गया है उतना नहीं है. हकीकत में मृतकों की संख्या 5 से 7 गुना अधिक है.

आपको बता दें कि क्रिस्टोफर लेफलर के रिसर्च के मुताबिक भारत देश में कोरोना महामारी से 20 लाख से ज्यादा लोगों की मृत्यु हुई है. वहीं केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार देशभर में अब तक कुल मृतकों की संख्या 3 लाख से 75 हजार 305 ही दिखाया गया है. ये पहली बार नहीं है कि जब मृतकों के आकड़ें पर सवाल उठाया गया हो इससे पहले भी कई बार सवाल किया जा चूका है. बता दें कि अमेरिकी अख़बार न्यूयार्क टाइम्स ने दावा किया था कि भारत में कोरोना से कम से कम 6 लाख के करीब में मृत्यु हुई है. लेकिन इस सभी आकड़ों की रिपोर्ट को खारिज कर दिया गया है. इस बात पर केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने ट्वीट के माध्यम से कहा कि एक अंतरराष्ट्रीय पत्रिका द्वारा भारत में कोरोना से अधिकारिक आकड़ें से 5 से 7 गुना अधिक लोगों की मृत्यु हुई है यह कहना पूर्ण रूप से गलत है. उन्होंने आगे कहा कि पत्रिका ने जिन अध्ययनों को आधार बनाया है वह किसी देश या क्षेत्र की मृत्यु दर तय करने के लिए वैध नहीं है.