तेलुगू सुपरस्टार महेश बाबू को नहीं आता इस भाषा को पढ़ना-लिखना, जानिए फिर कैसे चलाते हैं काम

तेलुगू सुपरस्टार महेश बाबू को नहीं आता इस भाषा को पढ़ना-लिखना, जानिए फिर कैसे चलाते हैं काम

तेलुगू सुपरस्टार महेश बाबू को नहीं आता इस भाषा को पढ़ना-लिखना, जानिए फिर कैसे चलाते हैं काम

साउथ सुपरस्टार महेश बाबू (Mahesh Babu) के चाहने वालों की लिस्ट बहुत लंबी है। सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि उनके फैंस विदेशों में भी है। तेलुगु सुपरस्टार महेश बाबू की फिल्में केवल साउथ में ही नहीं बल्कि पूरें भारत में अलग-अलग भाषाओं में डब करके देखी जाती है। लड़कियां उनके चार्मिंग फेस पर फिदा रहती हैं। पर क्या आपको पता है कि महेश बाबू तेलुगु भाषा को न तो लिखना जानते हैं और न ही पढ़ना।

यह एक मजेदार बात है कि भले ही महेश बाबू तेलुगू फिल्मों के सुपरस्टार हों मगर महेश बाबू तेलुगू भाषा को लिख या पढ़ नहीं सकते हैं। दरअसल महेश बाबू चेन्नई में बड़े हुए हैं। इस कारण वह तमिल और अंग्रेजी भाषा की तो अच्छी समझ रखतें है लेकिन बात जब तेलुगू भाषा की हो तो वह इस मामलें में मात खा जाते हैं। लेकिन रट्टा लगाने की कला में महेश बाबू को महारत हासिल है। डायरेक्टर के मुताबिक महेश बाबू याद करके अपने डायलॉग बढ़िया बोल लेते हैं।

महेश बाबू एक स्टार किड हैं और फिल्मों में आने से पहले ही काफी पॉपुलर रह चुकें हैं। वह सुपरस्टार कृष्णा के बेटे हैं जिन्होंने 350 से ज्यादा फिल्मों में काम किया था। महेश बाबू ने पिछले 20 सालों में लगभग 40 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है। उनकी फिल्में करोड़ों में कमाई करती हैं। महेश बाबू की पिछली फिल्म 'सारिलेरु नीकेवरु' ने 260 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की थी। महेश बाबू की पॉपुलेरिटी इतनी है कि नॉर्थ इंडिया में उनकी फिल्मो को डब करके देखा जाता है। एक्टर की अब तक कुल 18 फिल्में हिंदी में डब की जा चुकी हैं। इन फिल्मों में 'पोकिरी', 'अथाडु', 'डूकुडू', 'ओकडू', 'भारत आने नेनू' जैसी फिल्में शामिल हैं। इन फिल्मों का प्रसारण जब हिंदी चैनलों पर होता है तब इन चैनलों की टीआरपी सबसे ज्यादा हाई रहती है।