पश्चिम बंगाल में हिंसा अभी भी जारी, भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्त्ता के साथ हो रहे…

बंगाल चुनाव में मिले प्रचंड बहुमत से तृणमूल कांग्रेस चुनाव जीत गई. परन्तु चुनाव के उपरांत हुई व्यापक हिंसा ने जनादेश को कलंकित कर दिया. तृणमूल कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने करीब तीन दर्जन भाजपा कार्यकर्ताओं को मार डाला और अनेकों को अपाहिज बना दिया या फिर उनके घर – बार जलाकर उन्हें उजाड़ डाला और कुछ लोग असम की ओर पलायन कर गये. उस समय का हालात यह था कि लोगों को जान बचाने के लिए मतांतरण के लिए सोचना पड़ गया था. आपको बता दें कि अभी भी यह माहौल थम नहीं रहा है. दुखद खबर ये है कि राज्य सरकार अब भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्त्ता के परिवार को अपना पैतृक घर – बार छोड़ने पर मजबूर करने लगी है.

यह खबर पश्चिम बंगाल के बर्दवान शहर के आलमगंज के क्षेत्र से आई है. जहाँ तृणमूल कांग्रेस पार्टी से जुड़े कुछ लोगों ने ना सिर्फ भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्त्ता नवीन सरकार की माँ के साथ बदसलूकी की, बल्कि उन्हें परिवार समेत शीघ्र से शीघ्र गाँव छोड़ कर चले जाने की धमकी भी दी. उस समय नवीन की माँ ने तृणमूल कांग्रेस के लोगों से हाथ जोड़कर उन्हें गाँव से न निकालने की विनती भी की लेकिन तृणमूल कांग्रेस के लोग इतने क्रूरता से पेश आ रहे थे कि बताना मुश्किल है.

इसी तरह से कई और भी भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ इसी तरह के बर्ताव किये जा रहें हैं. विजयी तृणमूल द्वारा बड़े पैमाने पर हिंसा के जरिये विरोधियों के मन में भय पैदा करने का प्रयास ऐसे हुआ कि मानो कोई मध्यकालीन विदेशी सेना विजित देश के नागरिकों में अपना खौफ जमा रही हो. लोकतंत्र का अर्थ सिर्फ चुनावी जीत और हार से नहीं है बल्कि संस्थाओं की गरिमा और विरोध के लिए स्थान और सम्मान से भी होता है. बंगाल के हिंसा के नंगे नाच ने लोकतंत्र का गला घोट दिया.