कांग्रेस पार्टी लगातार परेशानी में घिरती जा रही है, पंजाब और राजस्थान के बाद केरल में भी डगमगाने लगी कांग्रेस

कांग्रेस पार्टी आजादी से पहले से ही भारत वर्ष में दस्तक दे दी थी. स्वंत्रता संग्राम के बाद अकेली सबसे ताकतवर पार्टी कांग्रेस थी. एक समय था जब इस पार्टी यानि कांग्रेस को ग्रैंड ओल्ड पार्टी के नाम से जाना जाता था. 25 वर्षों तक किसी की भी पार्टी की इतनी हिम्मत नहीं थी कि वो सीधे कांग्रेस पार्टी को टक्कर दे सके. देश में कांग्रेस पार्टी ने अधिक समय तक शासन किया है. लेकिन कहते हैं न कि समय के साथ सबकुछ धीरे – धीरे बदल जाता है. इस समय कांग्रेस के साथ भी यही हो रहा है.

इसी के साथ ही राजस्थान और पंजाब के बाद अब पार्टी को दक्षिण के ओर से भी मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. केरल कांग्रेस के एक भाग का कहना है कि हाईकमान की ओर से उन्हें नजरअंदाज करने साइडलाइन किया जा रहा है. बता दें कि बीते 2 मई को केरल विधान सभा चुनाव के परिणामो का ऐलान किया गया था. केरल में कांग्रेस पार्टी को हार का सामना करना पड़ गया था. इसी हार के बाद पार्टी ने हाईकमान का एक्शन लेते हुए प्रदेश अध्यक्ष ए. रामचंद्रन के अलावा विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथला को पद से हटा दिया.

इस तरह से केरल में शुरू हुए संकट ने कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी है. बता दें कि अभी हाल ही में राहुल और प्रियंका गाँधी के करीबी समझे जाने वाले जितिन प्रसाद का भाजपा में शामिल होना कांग्रेस के लिए एक बड़ा आघात है. ज्योतिरादित्य सिंधिया के बाद जितिन प्रसाद कांग्रेस के दूसरे ऐसे नेता है. जो राहुल गाँधी की युआ मंडली का चेहरा माने जाते थे. लेकिन यह एक सत्य है कि कांग्रेस में ऐसे नेताओं की संख्या बढ़ती जा रही है. जिनका पार्टी से मोहभंग हो रहा है. हर चार – छह माह बाद कांग्रेस का कोई न कोई नेता पार्टी से बाहर निकल जा रहा है. इस स्थिति के लिए कांग्रेस नेतृत्व अपने अलावा अन्य किसी को दोष नहीं दे सकता है. आखिर कुछ तो ऐसा है, जिसके चलते कांग्रेसी नेता पार्टी में अपना भविष्य नहीं देख रहें हैं.