ऑपरेशन लोजपा के बाद अब जेडीयू के निशाने पर ये पार्टी, बड़ी संख्या में विधायकों को पाला बदलवाने की तैयारी

बिहार की राजनीति में इन दिनों गज़ब हलचल मची हुई है और इस हलचल के केंद्र में है जेडीयू. विधानसभा चुनाव के जब परिणाम आये तो जेडीयू 43 सीटों के साथ राज्य में तीसरे दर्जे की पार्टी बन गई. बिहार NDA में अब तक सीनियर पार्टनर रही जेडीयू अब भाजपा की जूनियर पार्टी बन गई. ये सब हुआ चिराग पासवान की वजह से क्योंकि उन्होंने सिर्फ जेडीयू के खिलाफ अपने उम्मीदवार उतार दिए और उनके वोट काट लिए. सरकार का गठन तो हो गया और नीतीश कुमार जेडीयू के जूनियर पार्टनर रहते हुए भी सीएम बन गए लेकिन बीजेपी से कम सीट लाने की टीस अब भी उनके मन में है. इसलिए अब उनकी कोशिश दूसरी पार्टियों में तोड़फोड़ कर अपना कुनबा बढाने की है.

सबसे पहले तो जेडीयू ने लोजपा में तोड़फोड़ कर चिराग पासवान से अपना बदला लिया. चिराग अपने ही पार्टी में अलग थलग पड़ गए और उनके चाचा पशुपति पारस ने लोजपा पर कब्ज़ा कर लिया. साथ ही नीतीश की तारीफों के पुल बाँध ये भी जता दिया कि उनकी मंशा क्या है. जेडीयू ने लोजपा में तोड़फोड़ तो कर दिया लेकिन उसकी सीटो में इजाफा नहीं हो पाया क्योंकि लोजपा ने कोई सीट विधानसभा में नहीं जीती थी. जेडीयू को अपनी सीटों की संख्या बढाने के लिए किसी उस पार्टी में सेंधमारी करनी पड़ेगी जिसके पास विधायक हैं. ऐसे में जेडीयू के ऑपरेशन तीर का अगला निशाना है कांग्रेस. कांग्रेस एक ऐसी पार्टी है जिसके विधायक पाला बदलने के लिए पूरे देश में बदनाम हैं. जेडीयू भी जानती है कि कांग्रेस में सेंध लगाना ज्यादा मुश्किल नहीं होगा. कांग्रेस इस वक़्त महागठबंधन का हिस्सा है.

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में कांग्रेस ने 19 सीटों पर जीत दर्ज की थी. ऐसे में कांग्रेस में किसी भी जोड़-तोड़ को बिना दल-बदल कानून के दायरे में लाए आगे बढ़ने के लिए कम से कम 13 विधायकों को मनाना होगा. जेडीयू सूत्रों की माने तो 10 कांग्रेसी विधायक टूटने को तैयार हैं लेकिन मामला दो-तिहाई पर अटका है. कांग्रेस के जो अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े विधायक हैं वो टूटने को तैयार नहीं हो रहे. कांग्रेस विधायकों के टूटने और जेडीयू में शामिल होने के सवाल को नीतीश कुमार ने टाल दिया था. हालांकि जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने कहा कि जब कोई पुल बनता है, तभी पार करेंगे न। जब नौबत आएगी तो देखेंगे.