नाराज और बागी चाचा को मनाने उनके घर पहुंचे चिराग पासवान, गेट पर खड़े हो कर बजाते रहे हॉर्न पर हॉर्न लेकिन…

बिहार में राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं. दिवंगत राम विलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी दो फाड़ हो गई. उनके भाई पशुपति पारस ने उनके बेटे चिराग प[आस्वान के खिलाफ बगावत कर दी. चिराग अपनी ही पार्टी में अकेले पड़ गए क्योंकि उनके चाचा पशुपति पारस के साथ पार्टी के 6 में से 5 सांसद खड़े हैं. ऐसे में नाराज चाचा को मनाने के लिए खुद चिराग पासवान उनके घर पहुंचे. लेकिन देर का घर का दरवाजा ही नहीं खोला गया.

चाचा पशुपति पारस को मनाने के लिए चिराग पासवान उनके घर पहुंचे. चिराग चाचा पारस के घर के बाहर 25 मिनट तक खड़े रहे और हौर्न बजाते रहे तब जा कर घर का दरवाजा खुला. काफी देर बाद जब दरवाजा खुला तो पता चला कि पशुपति पारस घर पर मौजूद ही नहीं है. घर पर चिराग के चहेरे भाई प्रिंस राज मौजूद थे. चिराग को उनसे ही मुलाक़ात करके संतोष करना पड़ा.

उधर पशुपति पारस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए उन आरोपों को खारिज कर दिया कि उन्होंने पार्टी तोड़ी है. पशुपति पारस ने कहा कि ‘मैंने पार्टी तोड़ी नहीं है बल्कि पार्टी को बचाया है.’ उन्होंने कहा, ‘हमारे भाई चले गए, हम अकेले महसूस कर रहे हैं. भतीजे चिराग को लेकर उन्होंने कहा कि वो चाहें तो पार्टी में रह सकते हैं. उन्होंने कहा, ‘पिछले साल हमारे भैया रामविलास पासवान का निधन हुआ, उससे पहले करीब 20 बरस उनके नेतृत्व में पार्टी बहुत बढ़िया तरीके से चल रही थी. कहीं कोई शिकवा शिकायत नहीं था. मेरा दुर्भाग्य कहिए कि मेरे बडे भाई और छोटे भाई दोनों हमको छोड़कर चले गए. मैं अकेला महसूस कर रहा हूं.’

पशुपति पारस ने कहा, ‘कुछ असामाजिक तत्वों ने आकर हमारी पार्टी में सेंध लगाई. उसने 99 फीसदी वर्कर की भावना की अनदेखी कर गठबंधन को उसने तोड दिया. गठबंधन भी तोडा तो बेहद अजीब तरीके से, किसी से दोस्ती करेंगे, किसी से प्यार करेंगे, किसी से नफरत करेंगे. इसका परिणाम यह हुआ कि बिहार में एनडीए गठबंधन कमजोर हुआ, लोक जनशक्ति पार्टी बिल्कुल समाप्ति के कगार पर चला गया.’