LJP में चाचा-भतीजे के बीच मचे महासंग्राम को लेकर चुनाव आयोग करेगा फैसला, रविवार को होगी अहम बैठक

बिहार में तेजी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रम में दिवंगत राम विलास पासवान की पार्टी लोजपा टूट की कगार पर खड़ी है. दरअसल राम विलास पासवान के भाई पशुपति पारस के अपने ही भतीजे चिराग़ पासवान को एक के बाद एक बड़ा झटके दिए है. बता दें कि पहले उन्होंने अपने नेतृत्व में लोजपा के 6 में से 5 सांसदों को अपने साथ कर लिया. उसके बाद चिराग़ पासवान को LJP के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया. हालाँकि इसके बाद चिराग पासवान ने इस पर एक्शन लेते हुए पांचो सांसदों को पार्टी से निकाल दिया और इसके बाद से ही अब सियासी घमासान तेज़ हो गया है और अब ये लड़ाई चुनाव आयोग तक जा पहुंची है.

जानकारी के लिए बता दें कि कल यानी शुक्रवार को दोनों ही गुट अपने अपने दावों को लेकर चुनाव आयोग के सामने पहुंचे. जहाँ पर चिराग गुट ने 77 सदस्यों के नाम आयोग को सौंपे जबकि पारस गुट ने कार्यसमिति की सूची चुनाव आयोग को नहीं सौंपी. अब इस मामले पर फैसला रविवार को होना है कि लोजपा का असली हकदार कौन हैं?. हालाँकि इस दौरान पारस ने कहा कि वे जल्द ही अपनी कार्यसमिति की सूची आयोग को सौंपेगे. साथ ही उन्होंने कहा कि ‘फिलहाल राष्ट्रीय अध्यक्ष का नियुक्ति पत्र और पार्टी संविधान की प्रति आयोग को सौंपी है.’ 

वही दूसरी तरफ चिराग ने कहा कि ‘मेरे चाचा को पार्टी अध्यक्ष बनाने के लिए बुलाई गई बैठक पूर्णरुपेण असंवैधानिक थी. इस में राष्ट्रीय कार्यकारी के सदस्यों की उपस्थिति ना के बराबर थी. केवल नौ सदस्यों ने पारस को पार्टी का अध्यक्ष चुना. साथ उन्होंने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर पार्टी के चुनाव चिह्न और झंडे के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की है.’ जाहिर है कि बिहार में कुर्सी की लड़ाई दिन पर दिन बढ़ती जा रही है. वही अब ये देखना होगा कि इस पर चुनाव आयोग क्या फैसला लेता है.