70 साल से चल रही ऐतिहासिक गड़बड़ी रुकेगी, मोदी सरकार ने उठाया सराहनीय कदम

इतिहास तो हम सभी लोगों ने पढ़ा और समझा होगा. इतिहास पढ़ने के दौरान हम लोग इस बात पर गौर किये होंगें की इतिहास में कई ऐसे तथ्य हैं जो सही नहीं लगते हैं. सही नहीं लगने का अर्थ ये नहीं है कि वो तथ्य गलत हैं बल्कि यहाँ सही न लगने का तात्पर्य यह है कि इतिहास में कई ऐसे बातों और कई ऐसे लोगों को बहुत अधिक प्राथमिकता मिल गई है कि जो उस प्राथमिकता के लायक थे ही नहीं और जिन बातों और जिन लोगों को असली प्राथमिकता मिलनी चाहिए उन्हें मिली ही नहीं. बता दें कि इतिहास के इन्ही गलतियों को सुधारने के लिए केंद्र सरकार ने एक बहुत ही बड़ा और प्रशंसनीय कदम उठाया है.

आईये केंद्र सरकार के इस फैसले के बारे में जानते हैं. बता दें कि केंद्र सरकार के इस फैसले में जनता भी बराबर की सहभागी होगी. जनता के सहयोग से अब इतिहास में देश के नायकों को उनका उचित स्थान वापिस देने का उचित अवसर आ चूका है. बता दें कि अभी जल्द ही केंद्र सरकार की ओर से एक विज्ञप्ति सामने आई है. जिसने इसी ओर संकेत दिया है.

आपको बता दें कि केन्द्र सरकार की शैक्षणिक, महिला, बाल विकास, युवा एवं खेल संबंधित संसदीय स्टैंडिंग कमेटी ने अभी जल्दी ही विज्ञप्ति जारी की है. जिसमें ईमेल के माध्यम से स्कूली स्तर पर इतिहास के पुस्तकों में बदलाव करने पर ध्यान देने की बात की गई है. इसके लिए अंतिम सीमा 15 जुलाई है. इस नीती के मुताबिक इन बातों पर प्रमुख तौर से ध्यान दिया जायेगा कि कैसे भारतीय नायकों के बारे में ऐतिहासिक पुस्तकों में से भ्रामक कंटेंट को हटाया जाये और उन्हें उनका उचित सम्मान दिया जाये. चाहे वो मराठा नायकों के बारे में कहा गया असत्य हो या फिर सनातनी क्रांतिकारियों को भारतीय इतिहास में स्थान न मिलना हो ऐसी बहुत सी बातें हैं. जिन पर अब मंथन किया जा सकेगा. इसके साथ ही भारतीय इतिहास के सभी कालों का समानुपातिक संदर्भ सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य किया जायेगा.