हिन्दू वोटों के नाराज होने का डर, AAP ने यूपी में ओवैसी के साथ गठबंधन से साफ़ किया इनकार

उत्तर प्रदेश में 2022 में होने वाला चुनाव काफी दिलचस्प होने वाला है. इससे पहले भाजपा, बसपा और सपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला हुआ करता था और कांग्रेस कुछ वोट काट कर चंद सीटें हासिल कर लेती थी. लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी और ओवैसी की AIMIM ने भी यूपी चुनाव में ताल ठोक दिया है. ओवैसी ने ओम प्रकाश राजभर और कुछ छोटी छोटी पार्टियों को मिला कर भागीदारी संकल्प मोर्चा बनाया है. ओवैसी को उम्मीद हिया कि मुस्लिम बहुल इलाकों में वो वही कमाल कर सकते हैं जो बिहार में किया था. ओवैसी ये भी चाहते हैं कि इस भागीदारी संकल्प मोर्चा में आम आदमी पार्टी भी शामिल हो जाए. लेकिन शायद AAP को अकेले ही जीत दर्ज कर राज्य की सत्ता में आने का भरोसा है इसलिए वो इस गठबंधन में शामिल होने से इनकार कर रही है. इसकी एक वजह हिन्दू वोटों के नाराज होने का खतरा भी है.

दरअसल भागीदारी संकल्प मोर्चा में आम आदमी पार्टी के शामिल होने की चर्चा तब शुरू हुई जब ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि, ‘आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल से गठबंधन को लेकर मुलाकात करेंगे और इस दौरान आम आदमी पार्टी से भागीदारी संकल्प मोर्चा के साथ गठबंधन को लेकर निर्णायक बात होगी. इस मुलाकात के दौरान AAP नेता संजय सिंह भी मौजूद रहेंगे.’ लेकिन राजभर की उम्मीदों को संजय सिंह ने ही तोड़ दिया.

संजय सिंह ने भागीदारी संकल्प मोर्चा में AAP के शामिल होने की अटकलों की हवा निकालते हुए कहा कि ‘केजरीवाल जी से ओम प्रकाश राजभर जी की मीटिंग के बारे में जो भी ख़बर प्रकाशित हो रही है वो झूठी और बेबुनियाद है, ओपी राजभर जी झूठ बोल रहे हैं, केजरीवाल जी की उनसे कोई मुलाक़ात तय नहीं हुई है और ना ही उनसे किसी तरह का गठबंधन हो रहा है.’

दरअसल AAP को राजभर की पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी से कोई दिक्कत नहीं है. लेकिन ओवैसी के साथ जाने से दिक्कत है. दरअसल इसमें सबसे बड़ा खतरा हिन्दू वोटरों के नाराज होने का है. अगर हिंदूवादी छवि वाले योगी आदित्यनाथ के सामने ओवैसी और AAP के बीच किसी तरह का गठबंधन होता है तो चुनाव में साफ़ तौर पर ध्रुवीकरण होगा. केजरीवाल ये नहीं चाहते कि उनपर यूपी की सियासत में घुसने से पहले ही हिन्दू विरोधी या मुस्लिम परस्त होने का ठप्पा लग जाए.