बढती जनसंख्या पर लगाम लगाने के लिए योगी सरकार ला रही है नई जनसंख्या नीति, सीएम के सामने पेश किया गया मसौदा

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव में महज 6 महीने का वक़्त रह गया है. लेकिन उससे पहले योगी सरकार आगामी 11 जुलाई को योगी सरकार नई जनसंख्या नीति-2021-30 लाने जा रही है. इसके तहत यूपी में नवजात मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर को और कम करने की कोशिश होगी. 11 जुलाई को जनसँख्या दिवस है और उसी दिन इस नीति को लागू किया जाएगा. गुरुवार को सीएम के सामने लोकभवन में जनसंख्या नीति का मसौदा पेश किया गया.

उत्तर प्रदेश में पिछली बार साल 2000 में जनसंख्या नीति लाई गई थी जो 2016 तक के लक्ष्य को निर्धारित कर लाई गई थी. अब नयी जनसँख्या नीति 2030 तक लागू रहेगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि नई नीति में सभी समुदायों में जनसांख्यकीय संतुलन बनाए रखने के पर केंद्रित प्रयासों पर जोर दिया जाए. सीएम ने ये भी कहा कि बढती जनसँख्या के लिए गरीबी और अशिक्षा बड़ा कारक है. कुछ समुदायों में भी जनसंख्या को लेकर जागरूकता का अभाव है. ऐसे में समुदाय केंद्रित जागरूकता के प्रयास की जरूरत है.

नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 के अनुसार यूपी की जन्म दर अभी 2.7% है, जो राष्ट्रीय औसत से 2.2% से अधिक है. नयी जनसंख्या नीति में इसे 2.1 फीसदी पर लाने का लक्ष्य रखा गया है और 2030 तक इसे 1.9 तक लाने का लक्ष्य है. यूपी सरकार जनसंख्या नियंत्रण क़ानून लाने की भी तैयारी कर रही है. राज्य विधि आयोग जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून का मसौदा तैयार कर रहा है. इसमें सरकारी योजनाओं, नौकरियों व अन्य सुविधाओं को भी जनसंख्या से लिंक करने की तैयारी है. हाल ही में असम सरकार ने राज्य में जनसँख्या नियंत्रण क़ानून को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की घोषणा की है. असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्व सरमा ने भी दो-टूक कहा है कि राज्य सरकार कुछ विशेष सरकारी योजनाओं का लाभ देने में दो बच्चा नीति लागू करेगी. ये निति सभी योजनाओं में लागू नहीं किया जाएगा. क्योंकि कई योजनायें केंद्र के सहयोग से चलती है. यूपी का जनसँख्या नियंत्रण क़ानून असम से काफी हद तक प्रभावित हो सकता है. क्योंकि दोनों ही राज्यों में बीजेपी की सरकार है.