क्या मोदी सरकार का अगला मिशन है ‘यूनिफार्म सिविल कोड’? दिल्ली हाई कोर्ट ने कर दी बड़ी टिप्पणी और सरकार को दी ये सलाह

आर्टिकल 370 और राम मंदिर के बाद क्या मोदी सरकार का अगला प्लान कॉमन सिविल कोड है? ये सवाल इसलिए चर्चा में है है क्योंकि ये मुद्दा भाजपा के कोर एजेंडा में है और आज ही इस मुद्दे पर दिल्ली हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है. दिल्ली हाई कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कॉमन सिविल कोड की वकालत करते हुए केंद्र सरकार से इसपर कदम उठाने को कहा है. हाई कोर्ट ने इस पर निराशा जताई कि 1985 में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से जारी एक निर्देश के तीन दशक बाद भी इसे गंभीरता से नहीं लिया गया है.

एक केस पर सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा ‘अब समाज में धर्म, जाति और समुदाय की पारंपरिक रूढ़ियां टूट रही हैं, इसलिए समय आ गया है कि संविधान की धारा 44 के आलोक में समान नागरिक संहिता की तरफ कदम बढ़ाया जाए.’ संविधान का आर्टिकल 44 राज्य को उचित समय आने पर सभी धर्मों लिए ‘समान नागरिक संहिता’ बनाने का निर्देश देता है. इस आर्टिकल के मुताबिक देश में सभी धर्म के लोगों के लिए एक जैसा क़ानून होना चाहिए. ऐसा नहीं कि किसी धर्म में चार शादियों की इजाजत है तो किसी धर्म में बस एक ही शादी की इजाजत. इस वक़्त देश में मुस्लिमों के लिए कानून मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड बनाता है. कॉमन सिविल कोड लागू हो जाने के बाद सभी धर्म एक ही नियम पर चलने को बाध्य होंगे.

समय समय पर देश में कॉमन सिविल कोड के समर्थन में आवाजें उठती रही है. लेकिन अब तक इसे लागू करने की हिम्मत किसी सरकार ने नहीं दिखाई क्योंकि वोट बैंक आड़े आ जाता है. आज़ादी के 70 सालों तक कई क़ानून देश में सिर्फ वोट बैंक की वजह से लागू नहीं हो पाए. लेकिन मोदी सरकार आने के बाद से लोगों में उम्मीद जगी है क्योंकि भाजपा अपने घोषणा पत्र में किये वादों को पूरा कर रही है. चाहे तीन तलाक क़ानून हो, आर्टिकल 370 हटाना हो, राम मंदिर बनाना हो. देर अवर कॉमन सिविल कोड का नंबर भी आ ही जायेगा.