ट्रेन की पटरी के किनारे स्क्वायर बॉक्स क्यों बने होते हैं, जानें क्या होता है इसका काम

ट्रेन में यात्रा करते दौरान आपने पटरी के किनारे थोड़ी थोडी दूरी पर चौकोर ब्लॉक्स को देखा होगा, लेकिन इसके बारे में शायद ही कोई जानता होगा कि इस ब्लॉक्स टाइप को पटरी के किनारे क्यों बनाया जाता है.

दरअसल जानकारी देते हुए बता दें कि इन चौकोर बने ब्लॉग्स को रिफ्यूज इंडिकेटर कहा जाता है.ये रेलवे के लिए बेहद ही महत्तपूर्ण होते हैं. अब हम आपको बताएंगे इनका इस्तेमाल किस लिए होता है.तो जानते हैं अब इसके बारे में…

जानकारी के लिए आपको बता दें कि पटरी के किनारे बने हुए चौकोर ब्लॉग्स यानि की रिफ्यूज इंडिकेटर इसीलिए बनाए जाते हैं क्योंकि जब रेलवे विभाग के अधिकारी पटरियों की मरम्मत करते हैं, तो इस काम को करने में काफी समय लग जाता है.रेलवे के टेक्निकल डिपार्टमेंट के कर्मचारी मरम्मत करने के लिए जगह-जगह पहुंचते हैं तो तभी उसी ट्रैक पर यदि किसी ट्रेन को निकलना हो तो रेलवे के कर्मचारी पटरी के किनारे बने रिफ्यूज इंडिकेटर पर अपना समान व ट्रॉली को ट्रैक से हटाकर इसपर रखते हैं.

जब ट्रैन निकल जाती है तो रेलवे के कर्मचारी फिर से अपनी ट्रॉली फिर से ट्रेक पर रख देते हैं. रेलवे में हर जगह रिफ्यूज इंडिकेटर्स को जगह-जगह निश्चित दूरी पर बनाया जाता है.रेलवे की तकनीकि भाषा के अनुसार ट्रेन आने पर ट्रॉली को जिस जगह पर रखा जाता है उसी रिफ्यूज इंडिकेटर कहते हैं.रिफ्यूज इंडिकेटर कॉन्क्रीट से बना होता है. चौकार आकार में बने रिफ्यूज इंडिकेटर की ऊंचाई पटरी के बराबर की बनी होती है.