चाचा के बाद अब दिल्ली हाई कोर्ट ने भी दिया चिराग पासवान को झटका, पशुपति पारस के पक्ष में स्पीकर के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका ख़ारिज

अपने चाचा पशुपति पारस की बगावत की वजह से अपनी ही पार्टी में अलग थलग पड़े चिराग पासवान को अब कोर्ट से भी झटका लगा है. चिराग ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला के उस फैसले को कोर्ट में चुनौती दी थी जिसमे उन्होंने पशुपति पारस वाले गुट को मान्यता दे दी थी. चिराग ने अपनी याचिका में कहा था कि पार्टी विरोधी गतिविधियों और शीर्ष नेतृत्‍व को धेाखा देने की वजह से पशुपति कुमार पारस को पार्टी से निकाला जा चुका है. अब वो लोजपा के सदस्य नहीं हैं. लिहाजा उनके गुट को लोकसभा अध्यक्ष द्वारा मान्यता नहीं दी जा सकती. लेकिन कोर्ट में चिराग की दलील चली नहीं.

कोर्ट में स्पीकर की तरफ से पेश हुए वकील ने कहा कि इस याचिका पर सुनवाई का कोई आधार नहीं है क्योंकि खुद स्पीकर इस मामले को देख रहे हैं. वकील ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला भी दिया. जिसके बाद कोर्ट ने कहा कि जब तक स्पीकर इस मामले को देख रहे हैं वो कोई फैसला नहीं सुना सकते. कोर्ट में पशुपति पारस की तरफ से पेश हुए वकील ने कहा कि जब पारस ने अपने गुट को मान्यता देने वाला लेटर स्पीकर को दिया तब वो चीफ व्हीप थे. बाद में उन्हें पार्टी का लीडर चुना गया. इस पर कोर्ट ने चिराग की तरफ से पेश वकील को कहा कि आपको चुनाव आयोग जाना चाहिए था, यहाँ नहीं आना चाहिए था.

पिछले महीने चले हाई वोल्टेज ड्रामे में लोजपा के 6 सांसदों में से 5 ने पशुपति पारस को अपना नेता चुन लिया और एक मीटिंग कर पशुपति पारस को संसदीय दल का नया नेता भी घोषित कर दिया गया. सकी सूचना लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिड़ला को दी गई थी. इसके बाद लोकसभा सचिवालय ने पारस को मान्यता दे दी. उसके बाद चिराग ने पांचो सांसदों को पार्टी से निकाल दिया लेकिन तब तक देर हो चुकी थी और स्पीकर पशुपति पारस को ग्रुप को मान्यता भी दे चुके थे.