चीन चूका रहा भारत और अमेरिका से दुश्मनी करने की कीमत,हो गया ऐसा हाल

पुरे विश्व की चूलें हिला देने वाला कोरोना वायरस की उत्पत्ति की खबर भी चीन से ही आई है. बीते कुछ समय में वैश्विक स्तर पर ऐसे स्वर मुखर हुये हैं. जिनका जोर इस गहराई की परिकल्पना भी नहीं कर सकता है. चीन का समूचे विश्व में प्रथम स्थान पर वर्चस्व स्थापित करने के सपने ने पुरे विश्व को तबाही के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया था. वो तो धीरे – धीरे किसी तरह से स्थिति को संभाला गया है.

बता दें कि चीन के इस सुपर पावर बनने के सपने ने बहुत कुछ उजाड़ के रख दिया. चीन के इन्ही दुष्परिणामों के कारण कई देशों ने चीन से हथियार और अन्य सामानों का आयात करना बहुत कम कर दिया है. वो कहते हैं न कि अपनी ही करनी का फल है नेकियाँ रुशवाइयां आप के ही पीछे चलेंगी आप की परछाईयां. चीन के साथ भी ऐसा ही कुछ होता हुआ दिखायी दे रहा है.

आपको बता दें कि चीन कि स्थिति आज ऐसी है कि बड़े देश तो क्या पाकिस्तान को छोड़कर बाकि छोटे – छोटे देश भी चीन के हथियार और लड़ाकू विमान को खरीदना नहीं चाहते हैं. फॉरेन पॉलिसी की एक रिपोर्ट के अनुसार बता दें कि बीते महीने फिलिपींस में चीन की कार्यवाई के बाद से अब बहुत कम ही ऐसे देश बच गये है जो चीन के साथ भागीदारी करने में रूचि रखते हैं. इसी के साथ पत्रिका में ये भी लिखा था कि चीन भारत के साथ लद्दाख में भी सीमा विवाद में उलझा हुआ है. इसी वजह से दोनों देशो के बीच में द्विपक्षी रिश्ते बिगड़ गये हैं. बता दें कि भारत दुसरे देशों से हथियार खरीदता है लेकिन चीन से कोई भी सैन्य उपकरण नहीं खरीदता है. वहीं बात करें अगर दुसरे देशो की तो वियतनाम, मलेशिया और इंडोनेशिया तक चीन के हथियार नहीं खरीदते हैं. इसी तरह से स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि आत्मनिर्भर भारत स्कीम के अनुसार भारत लगातार खुद पर निर्भर हो रहा है.