भड़के पीएम मोदी ने सरकारी कर्मचारियों को लिया आड़े हाथ, काम में लेट लतीफी को लेकर लिया ये एक्शन

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काफी खफा होते हुए नजर आएं. पीएम मोदी सक्रिय शासन एवं समयबद्ध कार्यान्वयन यानी कि ‘प्रगति’ की मीटिंग में क्रोधित होते हुए नजर आएं. पीएम मोदी के चेहरे पर गुस्से का कारण है लेटलतीफी और ढीलापन.

सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी को क्रोध 8 परियोजनाओं की समीक्षा के चलते लेटलतीफी की खबर के बारे में पता चलने पर आया. इसके बाद पीएम ने मंत्रिमंडल सचिव राजीव गाबा को एक लिस्ट तैयार करने को कहा जिसमें उन अधिकारियों और एजंसियों के नाम शामिल हो जिनकी वजह से प्रोजेक्ट का काम रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है.

मिली जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजीव गोबा से कहा कि, वह 1 हफ्ते के अंदर अलग-अलग ‘डोजियर’ तैयार करें और हर एक प्रोजेक्ट की ताजा स्थिति से वाकिफ कराएं. इतना ही नहीं उन्होंने अस्पतालों में ऑक्सीजन को लेकर राज्यों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिया कि, वह अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट लगाने के काम में तेजी लाएं ताकि प्रत्येक बेड पर ऑक्सीजन पर्याप्त हो और लोगों को दिक्कतों का सामना ना करना पड़े. मालूम हो कि कोरोना वायरस की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी से देश में स्थितियां बहुत भयानक रहीं.

वहीं, पीएम मोदी इस कारण से क्रोधित हुए की यदि कोई प्रोजेक्ट लेटलतीफी में हो जाता है तो इससे सुविधा में भी देरी होती है और तो और खर्च भी कई गुना बढ़ जाते हैं. आपको बता दें कि लेटलतीफी के कारण ही रेलवे की एक परियोजना की लागत तिगुनी हो गई. वहीं, एक और प्रोजेक्ट भी लेटलतीफी के कारण अटक गया.

सूत्रों के मुताबिक, एक रिपोर्ट में बताया गया है कि बुनियादी ढांचा क्षेत्र की करीब 150 करोड़ रुपए या इससे ज्यादा खर्च वाली 483 परियोजनाओं की लागत में निर्धारित अनुमान से 4.43 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की वृद्धि हुई है. इनकी लागत बढ़ने का कारण परियोजनाओं को पूरा करने में हुई देरी तथा अन्य चीजें हैं.

मिली जानकारी के अनुसार, पिछले साल नवंबर के महीने में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के 21 अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी थी. दरअसल, इन अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप थे. आपको बता दें कि इससे पहले भी मोदी सरकार ने कई भ्रष्ट अधिकारियों की छुट्टी की है.

बताते चलें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यकाल के पहले दिन से ही सरकारी अधिकारियों पर काम को लेकर कड़े रुख दिखाए थे. ऑफिस आने में देरी तथा काम को लेकर लापरवाही पर भी सख्त चेतावनी दी गई. इसके बाद जो अधिकारी अपने रवैए में सुधार नहीं ला पा रहे थे उनके ऊपर सख्त एक्शन लिया गया.