रेलवे को ट्रेनों के निजीकरण के लिए एक खास नियामक की जरूरत, जो तय करेगा ये जरूरी चीजें

काफी समय से रेलवे में निजीकरण की बात सामने आ रही है लेकिन अभी इस पर पक्की मुहर लगना बाकी है. फिलहाल, तो निजीकरण होने पर कोई फैसला भी नहीं लिया जा रहा है. कई ऐसी परिस्थितियां कोविड-19 महामारी आदि के दौरान पैदा हुई जिससे कई परेशानियां हुईं.

मिली जानकारी के मुताबिक, मंत्रालय का कहना है कि पहले दौर की बोली अभी खत्म नहीं की गई है. इसका मूल्यांकन किया जा रहा है. मंत्रालय अभी नीलामियों और निजी बोली कर्ताओं की कम संख्या पर एक बार फिर से विचार कर रहा है.

सूत्रों के मुताबिक ये भी पता चला कि, आईआरसीटीसी को प्राइवेट ट्रेन चलाने के लिए जिस फंड की जरूरत है उसे जुटाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है जिसके लिए आईआरसीटीसी ने सरकारी उद्यम भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स (बीएचईएल) के साथ साझेदारी कर प्राइवेट ट्रेन चलाने के लिए शुरुआती बातचीत की लेकिन कोई सकारात्मक प्रभाव दिखता नहीं मिला. आपको बता दें कि उसके बाद अन्य कंपनियों के साथ भी साझेदारी की बात चलाई गई लेकिन उसमें भी कोई खास फायदा नजर नहीं आया.

जानकारी ऐसी भी मिली कि, प्राइवेट ट्रेनों को भारतीय रेलवे की राजधानी जैसी बड़ी और फेमस ट्रेनों के साथ प्रतिस्पर्धा करनी होगी. इसके साथ ही रेलवे ने किराए को लेकर भी बात कही. आगे ये भी कहा गया कि, रेलवे को आगे एक स्वतंत्र नियामक की जरूरत होगी जो रेलवे के निजीकरण को लेकर उसकी शर्तों और नियम तय करेगा. वहीं, नियामक को तय करना होगा कि समय सारणी का पालन हो और ट्रैक सामान रूप से साझा किया जाए.