किसने बनाई भारत की पहली निर्वासित सरकार, बिना पासपोर्ट के 31 साल रहे विदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आज राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय का शिलान्यास किया गया । साल 2019 में उत्तर प्रदेश ने जब राज्य स्तरीय इस विश्वविद्यालय की घोषणा की थी, तब से ही यह चर्चा का विषय बना हुआ है। आइये जानते हैं राजा प्रताप सिंह से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें…

मुरसान रियासत के राजा थे, बारात में संगरूर दो ट्रेनें गई थीं

महेंद्र प्रताप सिंह का जन्म 1 दिसंबर 1886 को जाट परिवार में हुआ था। प्रताप सिंह को क्षेत्र में पढ़े-लिखे लोगो की गिनती में शामिल किया जाता था। प्रताप सिंह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हाथरस की मुरसान रियासत के राजा थे जिनका विवाह जिंद रियासत की बलबीर कौर से हुआ था। प्रताप सिंह की शादी में हाथरस से संगरूर दो विशेष ट्रेनें गई थीं।

पहली निर्वासित हिंद सरकार का गठन किया
राजा महेंद्र प्रताप सिंह के पास भारतीय पासपोर्ट ना होने बावजूद भी उन्होंने 50 से ज्यादा देशों में यात्रा की थी। भारत को आज़ादी दिलवाने को लेकर किसी ने पहली बार देश के बाहर जाकर प्रयास किया था। प्रताप सिंह ने अफगान सर्कार से मदद लेकर पहली निर्वासित हिंद सरकार का गठन किया था। यह गठन
1 दिसंबर 1915 में हुआ था । वह 31 साल आठ महीने तक विदेश में रहे आजादी के लिए मदद की गुहार लगते रहे।
प्रताप सिंह के पास अफगानिस्तान सरकार का पासपोर्ट था उस समय पर अंग्रेज सरकार से पासपोर्ट मिलना बिलकुल भी संभव ही नहीं था । दरसअल डॉ वीर सिंह जिन्होंने राजा महेंद्र प्रताप की आत्मकथा को सम्पादित किया है उनके अनुसार प्रताप सिंह ने पासपोर्ट बनवाने के लिए देहरादून के डीएम कार्यालय में प्रयास किया था परन्तु जर्मनी के समर्थन में एक अख़बार में एक लेख लिखने के कारण पासपोर्ट बनाने को लेकर दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने ब्रिटैन जाने के लिए समुंद्री मार्ग का विकल्प चुना। बाद में उन्होंने स्विट्जरलैंड, जर्मनी, सोवियत संघ, जापान, चीन, अफगानिस्तान, ईरान, तुर्की जैसे देशों की यात्रा की।किये गए शर्तों के अनुसार 1946 में हिंदुस्तान वापस आ गए थे।

कांग्रेस से शूरू से मतभेद, अटल बिहारी वाजपेयी को करारी शिकस्त दी

कांग्रेस के साथ शुरुआत से ही प्रताप सिंह के रिश्ते मजबूत नहीं थे। राजा महेंद्र प्रताप सिंह की विदेश नीति में जर्मनी और जापान से अच्छे सम्बन्ध थे ,और इन्ही देशों से मदद मांगकर इन्होने आजादी की लड़ाई शुरू की थी। उस समय जवाहर लाल नेहरू के प्रधानमंत्री कार्यकाल चल रहा था जिनका इन देशों से मित्रता के सम्बन्ध नहीं थे ।

1957 के आम चुनाव में राजा महेंद्र प्रताप ने अटल बिहारी वाजपेयी के खिलाफ प्रत्याशी बने थे। इस चुनाव में मथुरा लोकसभा सीट से राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने चुनाव लड़ा था और अटल बिहारी वाजपेयी को करारी शिकस्त दी थी। प्रताप सिंह ने 55 फीसदी वोट हासिल की थी और उस वक्त 55 फीसदी वोट पड़ना बड़ी बात होती थी। इस चुनाव में लगभग 4 लाख 23 हजार 432 वोटर थे। इनमें 55 फीसदी यानी लगभग 2 लाख 34 हजार 190 लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। ।

नियमानुसार कुल वोटों का 1/6 वोट नहीं मिलने पर जमानत राशि जब्त हो जाती है।अटल बिहारी वाजपेयी को इस चुनाव में 1/6 से भी कम वोट मिले थे, जिसके चलते चुनाव में सर्वाधिक वोटों से जीते निर्दलीय प्रत्याशी राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने भारतीय जन संघ पार्टी के उम्मीदवार अटल बिहारी वाजपेयी की जमानत तक जब्त करा दी थी। इसके बाद राजा ने अलीगढ़ संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ा, जिसमें उन्हें जनता का जबरदस्त विरोध सहना पड़ा था।

संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना

संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना 1945 की गई थी। जबकि 1916 -17 में ही संसार संघ’ की परिकल्पना राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने विश्व शांति के लिए कर दी थी। प्रताप सिंह का मानना था कि संसार संघ की परिकल्पना से देश कभी आपस में नहीं लड़ेंगे। ‘ उन्होंने प्रेम धर्म और संसार संघ की परिकल्पना के जरिये भारतीय संस्कृति के प्राण तत्व वसुधैव कुटुम्बकम् को साकार करने का प्रयास किया था।  डॉ. अनूप शर्मा ने 23 वर्ष पहले ‘भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में राजा महेंद्र प्रताप की भूमिका’ विषय पर इतिहासकार डॉ. बिशन बहादुर सिंह के निर्देशन में शोध किया था। डॉ. अनूप शर्मा का कहना है, राजा महेंद्र प्रताप के साथ राजनीतिक दलों ने न्याय नहीं किया। उनको जो सम्मान मिलना चाहिए, वह नहीं मिला। राजा महेंद्र प्रताप अपने समय के बड़े क्रांतिकारी, महत्वाकांक्षा रहित राजनीतिज्ञ, महान त्यागी, महादानी, बेजोड़ शिक्षाविद एवं देशभक्त थे।

प्रताप सिंह चाहते थे सारा विश्व पांच प्रांतों में विभक्त हो, जिसकी एक राजधानी और एक सेना हो, एक न्यायालय व एक कानून हो। संसार संघ की सेना में सभी देशों के सैनिक शामिल हों। किसी भी देश की शक्ति संसार संघ की सेना से अधिक न हो। एक सेना होने से प्रत्येक देश का सैनिकों पर होने वाला व्यय रुक जाएगा और उस धन का उपयोग मानव कल्याण के लिए किया जाएगा।

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से ली शिक्षा

राजा महेंद्र प्रताप सिंह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्र थे और तब इस यूनिवर्सिटी को मोहम्मदन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेजिएट स्कूल के नाम से जाना जाता था । महेंद्र प्रताप ने इस विश्वविद्यालय के विकास के लिए 1929 में करीब तीन एकड़ की जमीन दो रुपए सालाना की लीज पर दे दी थी। यह जमीन मुख्य कैंपस से अलग शहर की ओर है जहां आज आधे हिस्से में सिटी स्कूल चल रहा है और आधा हिस्सा अभी खाली है। राजा महेंद्र प्रताप सिंह के योगदान के बारे में पूछने परपर उमर पीरजादा ने बताया की प्रताप सिंह की सेंट्रल लाइब्रेरी, मौलाना आजाद लाइब्रेरी में बड़ी तस्वीर लगी है, उन पर कई किताबें हम लोगों ने खास तौर पर रखी हैं और समय-समय पर उनके सम्मान में सेमिनार और संगोष्ठियां होती रही हैं।आपको बता दें शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान देने वाले राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने वृंदावन में अपनी जमीन पर प्रेम महाविद्यालय नाम से इंटर कॉलेज बनवाया था।