कभी पेट पालने के लिए गोलगप्पे का ठेला लगाता था ये क्रिकेटर अब आईपीएल खेलकर बन गया करोड़पति

इंडियन प्रीमियर लीग के देश में करोड़ो फैन्स हैं. इसमें विभिन्न राज्यों की टीम एक साथ खेलती हैं. इस खेल ने बहुत से खिलाड़ियों की किस्मत में चार चांद लगा दिया हैं, हम फिलहाल बात कर रहे हैं भारतीय युवा क्रिकेटर यशस्वी जायसवाल की जो कि अपनी कढ़ी मेहनत से आज यहां तक पहुंचे हैं.

दरअसल यशस्वी जायसवाल ने एक ऐसा दौर भी देखा है जब उन्होंने  अपना पेट भरने के लिए गोलग्प्पे भी बेचे थे.क्रिकेटर यशस्वी जायसवाल राज्यस्थान रॉयल्स के लिए आईपीएल मैच खेलते हैं, उनकी फीस एक सीजन की 2.4 करोड़ रूपए बताई जाती है.

यशस्वी जायसवाल की कहानी हर किसी को भावुक कर देगी. ये मैच खेलने से पहले मुंबई के आजाद मैदान के बाह गोलगप्पे का ठेला लगाया करते थे. इतना ही नहीं जायसवाल को अपनी ट्रेनिंग के दौरान टैट में भी जीवनयापन करना पड़ा था. 

अंडर 19 वर्ल्ड कप 2020 के दौरान यशस्वी जायसवाल का नाम सबसे अधिक चर्चा में था. इस दौरान उन्होंने  अंडर-19 वर्ल्ड कप 2020 में 400 रन बनाए थे, जिसमें एक शतक और 4 अर्धशतक शामिल थे.  

अपने जज्बे के कारण यशस्वी जायसवाल ने इस खेल में मैन ऑफ द टूर्नामेंट’ भी चुना गया. वहीं जब 2020 में आईपीएल में खिलाड़ियों की निलामी हुई थी तो उस दौरान राजस्थान रॉयल्स नें उन्हें 2.4 करोड़ की रकम से खरीदा था. जायसवाल ने अपनी सफलता के झंडे गाड़ते हुए विजय हजारे ट्रॉफी के एक मैच में झारखंड के खिलाफ 154 गेंदों में 203 रनों की तूफानी पारी खेली थी.

यशस्वी जायसवाल का जन्म उत्तर प्रदेश के भदोही में हुआ है.उन्होंने बचपन से ही गरीबी थी देखी थी लेकिन आंखों में 11 साल की उम्र से ही क्रिकेटर बनने का सपना लेकर ये मुंबई आ गए थे. जायसवाल को ने यहां आकर  अपनी पेट की भूख मिटाने के लिए गोल गप्पे व फल बेचे और एक डेयरी में भी काम किया था.

इतना ही नहीं यशस्वी ने पैसे कमाने के लिए मैदान में बॉल खोजने का भी काम किया था जिसके बाद उन्हें उससे कुछ रकम मिल जाती थी.

इस दौरान यशस्वी जायसवाल की जिंदगी में एक नया मोड़ आया. बता दें कि एक दिन यशस्वी आजाद मैदान में ही एक दिन क्रिकेट खेल रहे थे तभी कोच ज्वाला सिंह की नजर उनपर पड़ी और उन्होंने उनको कोचिंग देना शुरू किया क्योंकि ज्वाला सिंह खुद यूपी से थे . उनकी कोचिंग के बाद उनका टैलेंट निखरता चला गया और वो आज बहेतर क्रिकेटर बन गए. यशस्वी भी आज अपने कोच  ज्वाला सिंह की तारीफ किए बिना नहीं थकते हैं और कहते हैं मैं उनका गोद लिया हुआ बेटा हूं.