सावधान: क्या आपका हॉली-डे डेस्टिनेशन बन सकता है जानी दुश्मन…?

Lake Kivu, one of the largest of the African Great Lakes, In Rwanda

अक्सर हम अपने रोज की भाग दौड़ भरी ज़िन्दगी से वक़्त निकाल कर छुट्टियों में सैर के लिए निकल जाते हैं। कभी देश भ्रमण करने के लिए तो कभी विदेश यात्रा करने के लिए। कही भी जाने से पहले हम एक अच्छी सी जगह डिसाइड करते हैं और फिर उसके बारे में अच्छे से सर्च करते हैं जैसे की कौन कौन सी जगह वहां पर प्रसिद्ध है और घूमने के लिए बनी है। ऐसे में अगर आप अफ्रीका जाने के बारे में सोच रहे हैं और वहां के झीलों से प्रभावित हैं तो आपको इस झील के बारे अच्छे से जानकारी ले लेनी चाहिए ताकि आपको वहां पर किसी परेशानी का सामना ना करना पड़े। झील और झील के आस पास के नजारों की बात ही कुछ और होती है पर अगर ऐसी ही झीले जानलेवा साबित होने लगे तो ?? आज हम एक ऐसे अनोखी झील के बारे में बताने जा रहें हैं जो किसी भी जीव-जंतु के लिए मौत का कुंआ साबित हो सकता है।
दरसअल हम बात कर रहें हैं अफ्रीका महाद्वीप में स्थित किवू लेक की आपको तो मालूम ही होगा की अफ्रीका इक्वेटर के बीचो-बीच मौजूद है। आपको बता दें किवू झील को किलर झील के नाम से भी जाना जाता है। किवु लेक कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और रवांडा के बीच की सीमा पर स्थित है , और अल्बर्टिन रिफ्ट में है , जो पूर्वी अफ्रीकी दरार की पश्चिमी शाखा है। किवु झील रूज़िज़ी नदी में खाली हो जाती है , जो दक्षिण की ओर तांगानिका झील में बहती है । किवु झील लगभग 90 किमी (56 मील) लंबी और 50 किमी (31 मील) चौड़ी है। इसका अनियमित आकार इसके सटीक सतह क्षेत्र को मापना कठिन बनाता है, यह लगभग 2,700 किमी 2 (1,040 वर्ग मील) के कुल सतह क्षेत्र को कवर करने का अनुमान लगाया गया है , जिससे यह अफ्रीका की आठवीं सबसे बड़ी झील बन गई है। इस इलाके के आस पास लगभग 20 लाख लोग रहते हैं जिनके जीवन को खतरे से भरा हुआ माना जाता है।

Nyiragongo, Stratovulcano, DR Congo, Lava Lake, 2017

आपको जानकर हैरानी होगी कि इस झील का पानी जहरीला है जिसको अगर चंद मिनटों के लिए कोई भी जीव सूंघ भी ले तो कुछ ही समय के अंदर ही उसकी मौत हो सकती है। असल में इस झील के गहरे पानी में काफी मात्रा में मीथेन गैस बन रही है जो पानी को विषैला बना देती है। सिर्फ मीथेन गैस ही नहीं इस झील के पानी में कार्बन डाई ऑक्साइड की बड़ी परते भी पाई जाती है। इसी वजह से यहां पर प्रति एक हजार साल में लिमिनिक इरप्शन का खतरा बना रहता है। लिमिनिक इरप्शन में बड़ी मात्रा में कार्बन डाई आक्साइड झील की तली से पानी को चीरते हुए वायुमंडल में घुल जाती है। इससे यहां पर मौजूद प्राणियाें का जीवन खतरे में पड़ जाता है। यहां हल्का सा भी भूकंप आने पर इसमें विस्फोट भी हो सकता है। इसी कारण इसे दुनिया की खतरनाक झीलों में भी शुमार किया जाता है।

मीडिया रिपोर्ट्स की अगर मानें तो किवु लेक का प्रकोप सिर्फ यही नहीं थमता बल्कि इस झील के पानी से बना बादल भी जहरीली मीथेन गैस को समेटता है और अगर गलती से भी ये रिहायशी इलाके में बरसा तो उस बारिश से आसपास के इलाके में रहने वाले लाखों लोग मुसीबत में आ सकते हैं दूसरी ओर जहरीली गैस से भरे उस बादल से आसपास के इलाके में रहने वाले करीब 20 लाख लोग इसकी चपेट में आ सकते हैं।
मालूम हो की कांगो में संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन में तैनात भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल गौरव सोलंकी कीवु लेक में कयाकिंग ट्रिप करने गए थे, और इस दौरान उनकी मौत होगी थी । ऐसे ही मौत की और लापता होने की खबरे अक्सर सुनने को मिलती रहती हैं।


आपको जानकारी के लिए बतादें अफ्रीका के इस खतरनाक झील के बारे में अब एक अच्छी बात सुनी जा रही है। ऐसा मालूम हुआ है कि इस झील के पानी से ऊर्जा पैदा की जा सकती है। इससे स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में निश्चित रूप से सुधार आएगा। रवांडा सरकार ने किवु झील के पानी में मीथेन की बहुतायत की जानकारी मिलने पर वैज्ञानिकों की एक टीम को इस पर परीक्षण करने के लिए कहा ताकि वह सुरक्षात्मक उपायों को ढूंढने के लिए उपाय निकाले। टेस्ट के परिणाम काफी चौंकाने वाले आए थे। शोधकर्ताओं ने बताया कि पानी में काफी तादात में मीथेन मौजूद है पर हम उसका प्रयोग ऊर्जा के उत्पादन के लिए कर सकते हैं। वैज्ञानिकों का यह कहना है कि लोगों की जान किसी धमाके या जहरीली वर्षा से ना हो इसके लिए पानी से मीथेन गैस निकालना जरूरी होगा और इस प्रक्रिया में उससे गैस की भारी अप्रत्याशित आपूर्ति के जरिए भरपूर ऊर्जा पैदा हो सकती है। अब जल्दी ही यहां पर किवुवाट बायोगैस परियोजना शुरू की जायेगी।