चावल को ऐसे पकाने से आपको नहीं होगा कोई भी रोग,स्टडी में हुआ खुलासा

विटामिन और खनिजों से भरपूर चावल भारत में हर जगह खाया जाता है। कार्बोहाइड्रेट से भरपूर चावल घंटों भूख को दबा कर रख सकते हैं। इसके तेजी से पकाने के कारण, चावल इन लोगों का पसंदीदा हो सकता है जो दैनिक दिनचर्या में बहुत व्यस्त हैं। लेकिन चावल पर हाल ही में किया गया एक शोध आपकी चिंता बढ़ा सकता है।

एक प्रतिस्थापन अध्ययन के अनुसार, ऐसे चावल जो पूरी तरह से उबले नहीं हैं, यानी अधपके चावल खाने से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। दरअसल, इस जमाने का ज्यादातर खाना बिना केमिकल के नहीं बनता और हम उन्हें बड़ी लापरवाही से खा रहे हैं। ये भविष्य में कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को बढ़ावा दे सकते हैं।

इंग्लैंड में क्वीन्स यूनिवर्सिटी बेलफास्ट द्वारा किए गए इस अध्ययन के अनुसार, रसायन और कीटनाशक फसल को कीड़ों से बचाने और अच्छी पैदावार देने के लिए चावल को बेहद खतरनाक बना देते हैं। यह कई मामलों में आर्सेनिक विषाक्तता भी पैदा कर सकता है।

इस पर एक नहीं बल्कि कई अध्ययन हैं जो दावा करते हैं कि चावल एक कार्सिनोजेन हो सकता है जो कैंसर को बढ़ावा देता है। 90 के दशक के भीतर, महिलाओं पर कैलिफ़ोर्निया टीचर्स स्टडी ने कार्सिनोमा सहित कई अन्य प्रकार के कैंसर के संभावित जोखिमों की पहचान की। इसके अनुवर्ती कार्रवाई के दौरान, कुल 9,400 स्वयंसेवकों को कैंसर पीड़ित पाया गया, जिनमें सबसे अधिक संख्या में स्तन और कार्सिनोमा रोगी थे।

आर्सेनिक कई प्रकार के खनिजों में पाया जाने वाला रसायन हो सकता है। इसका उपयोग औद्योगिक कीटनाशकों और कीटनाशकों में किया जाता है। कई देश ऐसे भी हैं जहां तल के अंदर मौजूद पानी का आर्सेनिक स्तर बेहद ऊंचा है। इससे आर्सेनिक विषाक्तता का मामला बढ़ जाएगा जिससे उल्टी, पेट दर्द, दस्त और यहां तक ​​कि कैंसर भी हो सकता है।

अध्ययन के अनुसार, चावल में आर्सेनिक का स्तर बहुत अधिक होता है और अगर इसे ठीक से नहीं पकाया जाता है तो यह बहुत घातक साबित हो सकता है। स्टडी में चावल से होने वाले कैंसर से बचने के तरीके भी बताए गए हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, चावल पकाने से पहले, इसे रात भर पानी में भिगोने के लिए छोड़ दें। ऐसा करने से इसका टॉक्सिन लेवल अक्सर 80 फीसदी तक कम हो जाता है।