तेल सस्ता करने के लिए सरकार ने उठाया ये बड़ा कदम, इन पर होगी बड़ी कार्रवाई

दिनों दिन खाने के तेल के बढ़ते दामों को लेकर अब सरकार ने सख्त रूख अपना लिया है। इसी को देखते हुए उपभोक्ता मंत्रालय ने सभी राज्यों के व्यापारियों को एक पत्र जारी कर दिया है। इस पत्र के द्वारा उन्होंने सभी व्यापारियों से हर सप्ताह स्टॉक घोषित करने की मांग की है। जिसके बाद सरकार दलहन की तरह ही तिलहन के स्टॉक और उसके दाम चेक कराएगी। इसमें राज्य आपूर्ति अधिकारी (Stock Check) स्टॉक चेक रेटों का रिव्यू करेंगे। इसकी वजह सरसों से लेकर रिफाइड समेत खाने के तेलों में पिछले साल में बहुत अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इन पर काबू पाने के लिए सरकार कई बड़े कदम उठा रही है।

जमाखोरी है तेल कीमतों के इजाफे की बड़ी वजह

सरकार की मानें तो खाद्य तेलों के दाम बढ़ने की असली वजह जमाखोरी है। सरकार ने दामों को रोकने के लिए आयात सीमा शुल्क भी कम कर दिया था। इसके बावजूद तेल की कीमतों पर कोई असर नहीं पड़ा। इसी को देखते हुए सरकार ने अब जमाखोरों पर शिकंजा कसने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम (ईसीए) के तहत कारोबारियों, व्यापारियों और प्रसंस्करण करने वाली इकाइयों को स्टॉक का खुलासा करने का आदेश दिया है। साथ ही इसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार को दी है। वस्तु अधिनियम के तहत राज्य सरकारों का यह अधिकार दिया गया है।

इसलिए लिया गया है अहम फैसला

दरअसल तेलों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए सरकार को यह फैसला लेना पड़ा है। सरकार ने 2021 22 के लिए सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य यानि एमएसपी 4650 रुपये प्रति क्विटंल रखा था, लेकिन इस समय बाजार में सरसों की कीमतों की बात करें तो यह 9500 रुपये प्रति क्विटंल पहुंच गई हैं। वहीं इसमें अभी भी तेजी की संभावना नहीं हुई है। इसकी अब सरसों के तेल में दूसरे खाद्य तेलों की ब्लैंडिंग को रोक दिया गया है। इसकी वजह से सरसों के तेल की मांग काफी ऊपर पहुंच गई है।