आंतकियों ने स्कूल में घुसकर सबसे पहले चेक किए थे पहचान पत्र, फिर दो टिचरों को मारने के लिए इस तरह से चुना था

श्रीनगर में  ईदगाह इलाके के सरकारी स्कूल में हुए आंतकी हमले ने सबको झकझोर कर दिया है. खबरों की माने तो आतंकियों ने सबसे पहले टीचरों के पहचान पत्र को देखा था. जब उन्होंने पाया कि महिला प्रिंसिपल कश्मीरी सिक समुदाय से है और एक टीचर कश्मीरी पंडित है तो उन्होंने दोनों के कंधे पर बंदूक रख दी और ताबड़तोड़ गोलियां चला दी.

दोनों की हत्या करने के बाद आतंकी तुरंत वहां से फरार हो गए. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आतंकी  बॉयज हायर सेकेंडरी स्कूल में सुबह करीब 10.30 बजे घुस गए. ऑफलाइन क्लास चलने के कारण बच्चे स्कूल में नहीं थे लेकिन स्कूल के स्टाफ को कुछ घंटे के लिए बुलाया जाता था. 

स्टाफ के पहचान पत्र चेक करने के बाद आतंकी 44 वर्षीय सुपिंदर कौर और उनके सहयोगी दीपक चंद को स्कूल की बिल्डिंग से बाहर ले गए और वहां उनपर गोलियां चलानी शुरू कर दी. इस दौरान दीपक चंद की मौके पर ही मौत हो गई और कौर ने अस्तपताल ले जाते समय दम तोड़ दिया.  इससे दो दिन पहले भी आतंकियों ने  शहर के एक प्रमुख कश्मीरी पंडित व्यवसायी और बिहार के एक प्रवासी सड़क किनारे सामान बेचने वाले शख्स की हत्या कर दी थी.

इन हत्याओं की जिम्मेदारी पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी द रेसिस्टेंस फ्रंट ने ली है.   प्रतिबंधित संगठन ने सफाई देते हुए कहा कि इन पीडितों का धर्म से कोई लेना देना नहीं है. आगे कहा कि स्कूल के प्रिंसिपल और उनके सहयोगी को इसीलिए निशाना बनाया क्योंकि उन्होंने छात्रों पर 15 अगस्त को परिसर में स्वतंत्रता दिवस समारोह में भाग लेने के लिए दबाव डाला था.

दरअसल स्कूल टीचर का परिवार उन सैकड़ों शरणार्थियों में से एक है जो तीन दशक पहले जम्मू से निष्कासन के बाद चले गए थे. ऐसे लोगों के लिए पीएम मोदी ने विशेष नौकरी का ऐलान किया था जिसके तहत दीपक को अक्टूबर 2018 में नौकरी लगी औऱ वो एक बेटी का पिता भी था.

वहीं स्कूल की प्रिंसिपल कौर के दो बच्चे हैं, इनके पति जम्मू-कश्मीर बैंक में पीओ है. ये श्रीनगर के ऊपर इलाके अलूचा बाग की रहने वाली थीं.