वाल्मीकि जयंती : कैसे एक घटना से डाकू से साधु बने महर्षि वाल्मीकि

आज देश में आदिकवि महर्षि वाल्मीकि की जयंती का महोत्सव बनाया जा रहा है. रामायण के रचनाकार महर्षि वाल्मीकि का जन्म अश्विन मास के शुक्‍ल पक्ष की पूर्णिमा यानी कि शरद पूर्णिमा को हुआ था. पौराणिक कथाओं के बताया जाता है कि कभी वैदिक काल में महान ऋषि वाल्‍मीकि हुआ करते थे,लेकिन इसी दौरान उनके साथ कुछ ऐसी घटना घटी जिसके बाद उनका जीवन ही बदल गया.

दरअसल वाल्मीकि का जन्म महर्षि कश्यप और अदिति की 9वीं संतान वरुण और पत्नी चर्षणी के घर हुआ था, कहा जाता है कि जब ये छोटे थे तभी इन्हें कुछ भील चुराकर ले गए थे और इनका पालन पोषण भी भील समाज के लोगों ने ही किया. इनका पहला नाम रत्नाकर था. रत्नाकर एक तरीके से लूटेरे बन गए वहां जंगल से गुजरने वाले सभी व्यक्तियों के साथ लूट-पाट करता था. एक दिन की बात है जब जंगल से नारद मुनि गुजर रहें तो रत्नाकर ने उन्हें पकड़कर बंदी बना लिया. फिर नारद मुनि ने रत्नाकर से कहा कि तुम ये सब पापा क्यों करते हो?  इस पर रत्नाकर ने उत्तर दिया कि ये सब में पने परिवार के लिए करता हूं’. नारद ये सुनते ही हैरान रह गए फिर उन्होंने दोबारा रत्नाकर से प्रश्न पूछा कि क्या तुम्हारा परिवार तुम्हारे पापों का फल भोगने को तैयार है. रत्नाकर ने निसंकोच हां में जवाब दिया.

इसके बाद नारद मुनि रत्नाकर से कहा कि इतनी जल्दी जवाब देने से पहले अपने परिवार से पूछ लों तो ये बात सुनकर रत्नाकर अपने गर गया और परिवार के सदस्यों से कहा कि क्या कोई उसके पापों का फल भोगने के लिए तैयार हो सकता है. इस बात पर सभी परिवार के सदस्यों ने इनकार कर दिया. इस जवाब को सुनते ही रत्नाकर सन्न रह गया और तभी से उसने फैसला लिया कि वो अपने जीवन कभी भी गलत काम नहीं करेगा.  इसके बाज उन्होंने राम का नाम जाप करना शुरू कर दिया. उनको तपस्या करते करते वर्षों बीत गए.यहां तक की चीटिंयों ने उनके चारों टीले बना लिया, सर्दी हो या गर्मी बरसात, पूरी तरह से वो तपस्या में लीन हो गए. इसके बाद उनको महर्षि वाल्मीकि की उपादि दी गई. इसका अर्थ होता है ‘चींटी के टीले से पैदा हुआ.’

वाल्मीकि जयंती शरद पूर्णिमा तिथि पर मनाई जाती है.जानकारी के लिए बता दें कि  पूर्णिमा तिथि के लिए पूजा का समय 19 अक्टूबर को शाम 7 बजकर 3 मिनट से शुरू है और आज रात 8 बजकर 26 मिनट पर समाप्त होगा. बता दें कि वाल्मीकि जयंती को परगट दिवस के रूप भी मनाया जाता है.