लखीमपुर हिंसा : विपक्ष के अरमानों पर फिरा पानी, किसानों और प्रशासन में हुआ समझौता

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर हिंसा में चार किसानों सहित तीन बीजेपी कार्यकर्ताओं और एक पत्रकार की मौत हो चुकी है. इस हिंसा के बाद मारे गए लोगों के शव को सड़क पर रखकर किसान अपनी मांगे रखे रहे हैं. बताया जा रहा है कि सरकार और किसानों के बीच अब समझौता हो गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार  मृतकों को 45-45 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी इसके साथ ही परविार के एक सदस्य को नौकरी दी जाएगी.

इसके अलावा जो इस हिंसा में घायल हुए हैं उन्हें 10 -10 लाख रुपए की मुआवजा दिया जाएगा और पूरे मामले की रिटायर्ड जज के जरिए न्यायिक जांच होगी. वहीं राकेश टिकैत ने कहा है कि  केंद्रीय गृह राज्य मंत्री का नाम एफआईआर में दर्ज हुआ है, 10-11 दिन का जो समय प्रशासन ने मांगा है अगर उसके अंदर का कार्रवाई नहीं की गई तो हम पंचायत करेंगे. हम किसानों के दह संस्कार तक यही रहेंगे पांच डॉक्टरों की निगरानी में पोस्टमॉटम किया जाएगा. 

राकेश टिकैट ने आगे भी कहा है कि अभी इंटरनेट नहीं चल रहा है इसलिए हमें बहुत सारी वीडियो सबूत नहीं मिले हो लेकिन जैसे ही इंटरनेट चलेगा, आपके पास कोई वीडियो है तो वह हमें जरूर भेजें.’ केंद्रीय गृहराज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा पर इस हिंसा का आरोप लगाया जा रहा है. इसी के चलते अजय मिश्रा ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा है कि किसानों की हिंसा में बीजेपी के तीन कार्यकर्ताओं और कार ड्राइवर की जान गई है.

बता दें कि लखीमपुर खीरी में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या का दौरा था. इसके लिए केंद्रीय गृहराज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे उन्हें रिसीव करने जा रहे लेकिन तभी किसानों ने उन्हें काले झंडे दिखाकर रोक लिया और काफी झड़प हो गई और गाड़ी की टक्कर के दौरान किसानों की मौत हो गई. जिसके बाद अब ये हिंसा और भी बढ चुकी है.

वहीं केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा का कहना है कि जब ये हादसा हुआ तब उनका बेटा वहां मौजूद नहीं था. फिलहाल इस स्थिति पर काबू पाने की कोशिश की जा रही है. सीएम योगी ने  एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार को लखीमपुर भेजा. इसके साथ ही पुलिस की कई कंपनियां भी वहां तैनात की गई हैं.