FATF में मोदी सरकार को मिली बड़ी सफलता,लेकिन पाक को लगा दोहरा झटका

आतंकवाद को पालने वाले पाकिस्तान को लगातार झटके मिल रहे हैं, मगर अब भी वह सबक नहीं ले पा रहा है। पाकिस्तान की तमाम कोशिशों के बावजूद वह एफएटीएफ की ग्रे सूची से बाहर नहीं निकल पा रहा है। इस मामले में एक बार फिर उसे वैश्विक संस्था से झटका लगा है। एफएटीएफ (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) ने पाकिस्तान को अपनी ग्रे सूची में बरकरार रखा है। इतना ही नहीं, इस बार उसके दोस्त तुर्की को भी झटका लगा है। एफएटीएफ ने तुर्की को मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने में कमियों के लिए ‘ग्रे लस्टि’ में शामिल किया। तुर्की के अलावा, जॉर्डन और माली को भी ग्रे सूची में जोड़ा गया है, जबकि बोत्सवाना और मॉरीशस को सूची से हटा दिया गया है। 

गौरतलब है कि एफएटीएफ का फैसला तब आया है, जब पाकिस्तान और तुर्की पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। तुर्की की मुद्रा में गिरावट दर्ज की गई है और मुद्रास्फीति लगभग 20 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वहीं पाकिस्तान की कंगाली के मुहाने पर खड़ा है। वह इतना लाचार हो चुका है कि अब उसे कोई जल्दी कर्ज देने को भी तैयार नहीं हो रहा है। बता दें कि तुर्की ने अतीत में एफएटीएफ की बैठकों में पाकस्तिान का जोरदार समर्थन किया है ताकि यह सुनश्चिति किया जा सके कि वैश्विक निगरानीकर्ता उसे काली सूची में नहीं डाले।
दरअसल, एफएटीएफ ने मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी वित्तपोषण के खिलाफ लड़ाई में प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तीन दिवसीय पूर्ण बैठक बुलाई थी। एफएटीएफ के अध्यक्ष डॉ. मार्कस प्लीयर ने कहा कि पाकिस्तान लगातार ग्रे सूची में है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तानी सरकार आतंकवाद के खिलाफ 34 सूत्रीय एजेंडे में से चार को पूरा करने में विफल रही है। पाक ने संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधित आतंकवादियों के खिलाफ भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। पाकिस्तान जून, 2018 से इस सूची में है। प्लीयर ने कहा था कि पाकिस्तान तब तक ग्रे लिस्ट में रहेगा तब तक कि वह जून, 2018 में सहमत कार्य योजना को पूरा नहीं कर लेता।


क्या है एफएटीएफ
फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स यानी एफएटीएफ एक इंटरनेशनल निगरानी निकाय है, जिसे फ्रांस की राजधानी पेरिस में जी7 समूह के देशों द्वारा 1989 में स्थापित किया गया था। इसका काम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण पर नजर रखना और कार्रवाई करना है। एफएटीएफ का निर्णय लेने वाला निकाय को एफएटीएफ प्लेनरी कहा जाता है। इसकी बैठक एक साल में तीन बार आयोजित की जाती है।

क्या है ग्रे लिस्ट
आतंकी संगठनों की वित्तीय मदद करने और हवाला व अन्य चैनलों के माध्यम से उन तक पैसा पहुंचाने वाले देशों को इसमें रखा जाता है। उन्हें ये अवैध गतिविधियां बंद करने और आतंकियों पर ठोस कार्रवाई करने के लिए चेतावनी देते हुए कुछ वक्त दिया जाता है। जब तक वे ऐसा नहीं करते हैं, उन्हें ग्रे सूची में रखा जाता है।
अर्थव्यवस्था पर असर: 
पाकिस्तान के एफएटीएफ ग्रे लिस्ट में बने रहने से उसकी आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ना तय है। पाकिस्तान को अंतरराष्ट्री मुद्राकोष (आईएमएफ), विश्व बैंक और यूरोपीय संघ से आर्थिक मदद मिलना भी मुश्किल हो जाएगा। दूसरे देशों से भी पाकिस्तान को आर्थिक मदद मिलना बंद हो सकता है। क्योंकि कोई भी देश आर्थिक रूप से अस्थिर देश में निवेश करना नहीं चाहता है।