बचपन में कई बार यौन शोषण का शिकार हुईं थी नीना गुप्ता, Sach Kahun Toh में एक्ट्रेस ने किया खुलासा

नीना गुप्ता

नीना गुप्ता

बॉलीवुड एक्ट्रेस नीना गुप्ता (Neena Gupta) की ऑटोबायोग्राफी 'सच कहूं तो' (Sach Kahun Toh) को रिलीज हुए कई महीने हो चुके हैं। उनकी किताब की रिलीज के बाद से ही एक्ट्रेस की जिंदगी के कई राज़ पर से पर्दा उठ गया है। एक्ट्रेस ने अपनी किताब 'सच कहूं तो' में अपनी जिंदगी के कई किस्से सुनाए हैं। एक्ट्रेस ने इस किताब में अपने बचपन के उन सभी राज पर से भी पर्दा उठाया है, जिनसे वह काफी डर गई थीं। एक्ट्रेस ने अपनी किताब में खुलासा किया है कि बचपन में उनका कई बार यौन शोषण (Sexual Abuse) हुआ था। नीना गुप्ता ने इस बारें में लिखते हुए बताया कि उनके साथ टेलर और डॉक्टर दोनों ने ही ये हरकत की थी।

एक्ट्रेस ने अपनी किताब में लिखा है कि ये बात तब की है जब वह स्कूल में पढ़ रहीं थी। एक बार नीना गुप्ता अपने भाई के साथ आंखो के डॉक्टर के पास गईं थी। एक्ट्रेस के भाई ने उन्हें अकेले डॉक्टर के केबिन में भेज दिया और खुद वेटिंग रूम में बैठ गया। नीना ने आगे लिखा, "डॉक्टर ने मेरी आंखे चेक करना शुरु की और फिर वह नीचे दूसरी जगहों पर भी चेक करने लगा जिससे मेरी आंखो का कोई लेना देना नहीं था। मेरे साथ जब ये सब हुआ तो मै बहुत डर गई थी और घर आते वक्त पूरे रास्ते मुझे अपने आप से नफरत होती रही। जब कोई नहीं देख रहा था तो मै घर के एक कोने में बैठकर रोने लगी। लेकिन मैंने अपनी मां को इस बारे में बताने की हिम्मत नहीं की मैं इस बात से इतना डर गई थी कि मुझे लगा वह कहेगी कि यह मेरी गलती थी। मैंने ही शायद उसे भड़काने के लिए कुछ कहा या किया था।"

इसके अलावा एक्ट्रेस ने ऐसी ही एक और घटना के बारें में बताया। जब वह एक लोकल टेलर के यहां पर गईं थी और उसने उनकी माप लेते हुए उन्हें गलत तरीके से छुआ था। इतने डरावने एक्सपीरियंस होने के बावजूद एक्ट्रेस ने अपनी मां को इसके बारें में नहीं बताया। एक्ट्रेस ने लिखा, "क्योंकि मुझे लगा जैसे मेरे पास और कोई ऑप्शन नहीं था। अगर मैंने अपनी मां से कहा कि मैं उसके पास नहीं जाना चाहती, तो वह मुझसे पूछेंगी कि क्यों और मुझे उन्हें बताना होगा।" आगे अपनी किताब में एक्ट्रेस ने लिखा कि वह अकेली नहीं थी, जिसके साथ ऐसा सब कुछ हुआ था। उनकी क्लासमेट्स ने भी ऐसा ही कुछ अनुभव किया था और उन्होंने बोलने से इंकार किया था। एक्ट्रेस लिखती हैं कि उस समय बोलने का मतलब था कि जो भी थोड़ी बहुत आजादी उनके पास थी वह उनसे छीन ली जाती या फिर उससे भी बुरा ये कि इन सब के लिए उन्हें ही दोषी ठहरा दिया जाता।