भगवान शिव जहाँ के खुद है निवासी , उन्ही ज्योतिर्लिंगों में से एक है विश्वनाथ काशी , जाने यहाँ की महिमा

काशी विश्वनाथ एक ऐसा शहर जहाँ जाने के लिए हर कोई तरसता है । कहा जाता है काशी भगवान शिव की नगरी है और उन्ही के इस धाम को लोग काशी विश्वनाथ के नाम से जानते है । और आज वही काशी धाम लोगों को जनता को अर्पण होने जा रहा है। लेकिन क्या आप लोग भगवान शिव के शिवलिंग का पौराणिक इतिहास जानते है ?

आपको बता दें की काशी विश्वनाथ मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में एक माना जाता है। और इस ज्योतिर्लिंग की पूरे विश्व में बहुत ज़्यादा मान्यता है । लोगों का मानना हैं की एक बार काशी के दर्शन और पवित्र गंगा में स्नान के बाद लोगों के सारे पाप नष्ट हो जाते है । ये काशी विश्वनाथ मंदिर हज़ारों वर्षों से यहाँ है । कहा जाता है की घोर से घोर कलियुग में भी इस मंदिर पर कोई आँच नहीं आयी और न कभी आएगी क्यूँकि जब महा प्रलय आती है तो स्वयं भगवान शिव इस नगरी को अपने त्रिशूल पर उठा लेते है और सब शांत होने के बाद इसे पुनः स्थापित कर देते है ।

माना जाता है की एक बार भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा में खुद को एक दूसरे से बेहतर साबित करने का युद्ध छिड़ गया । दोनों एक दूसरे से लड़ाई करने लगे की सर्वश्रेष्ठ हूँ । इसके बाद दोनों ही अपने वाहन पर सवार हुए और स्तंभ के अंत को तलाशने के लिए निकल गये दोनों के दूसरे की विपरीत दिशा में रवाना हो गये ब्रह्माजी ऊपर की और गये तो विष्णु जी नीचे की और रवाना हो गये। और देखते ही देखते और स्तंभ भगवान शिव के रूप में बदल गया । इसके बाद दोनों को अपनी गलती का एहसास हुआ । और फिर भगवान शिव खुद वहाँ स्थापित हो गये।

लोग इस जगह को सृष्टि स्थली भी बोलते है कहा जाता है की भगवान विष्णु ने संसार की रचना करने के लिए आशुतोष भगवान की तपस्या की और उनसे प्रसन्न होकर ही भगवान उन्हें आशीर्वाद दिया फिर उनके शयन करने पर उनकी नाभि कलम से ब्रह्माजी की उत्पत्ति हुई और उन्होंने ही पूरे संसार की रचना की । कहा जाता है की बनारस में अपनी आख़िरी साँस भरने वाले को मोक्ष कि प्राप्ति होती है और लोग इसी चाहत में अपनी ज़िंदगी का आख़िरी पल यहाँ बिताने आते है।