कौन हैं पीलू मोदी आइए जाने उनके बारे में कुछ रोचक तथ्य

नाम पीलू मोदी
पूरा नाम, वास्तविक नाम पीलू मोदी
जन्म 14 नवंबर, 1926
जन्म स्थान मुम्बई, महाराष्ट्र
पिता का नाम सर होमी मोदी
माता का नाम जेराबाई
राष्ट्रीयता भारतीय
मृत्यु 29 जनवरी 1983

आज बात पीलू मोदी की हो रही है उनकी जिंदादिली के किस्से जानने से पहले कुछ बुनियादी बातें जान लेते हैं.

पीलू मोदी का जन्म 14 नवम्बर, 1926 को एक मुम्बई के एक पारसी परिवार में हुआ था पीलू मोदी अपना बर्थडे साझा करते थे नेहरू के साथ. पीलू के पिता प्रतिष्ठित पारसी थे. सर होमी मोदी कारोबारी भी और गांधीवादी भी थे. अंग्रेजों के जमाने में विधायक रहे. फिर संविधान सभा के सदस्य रहे और उसके बाद यूपी के राज्यपाल. अगर आपको सरोजिनी नायडू का नाम ध्यान आ रहा हो तो दुरुस्त कर लें. नायडू यूनाइटेड प्रोविंस की पहली राज्यपाल थीं. यूपी 1950 में बना और तब इसके गवर्नर थे होमी मोदी. 1952 तक वह इस पद पर रहे. होमी के तीन बच्चे. दो मशहूर हुए. रुसी और पीलू मोदी. ये पीलू मोदी की कहानी है. उनकी शुरुआती स्कूली पढ़ाई बंबई के कैथेड्रल ब्वायज स्कूल में हुई. यहां उनके क्लासमेट थे जूनागढ़ रियासत के दीवान शाहनवाज भुट्टो के बेटे जुल्फिकार अली भुट्टो. वही जुल्फिकार जो बाद में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने. बेनजीर इन्हीं की बेटी थीं. पीलू और जुल्फिकार पक्के दोस्त थे. बाद के दिनों में पीलू ने ‘जुल्फी माई फ्रेंड’ के नाम से उन पर किताब भी लिखी थी सिर्फ जुल्फिकार ही नेता नहीं बने, पीलू भी इस लाइन में आए. पिता की तरह. ट्रेन में कारसेवकों को जलाने के बाद देश की तारीख में गाढ़ी स्याही से दर्ज हो चुके गुजरात के गोधरा से सांसद रहे.

पीलू मोदी उस पार्टी के सांसद थे, जिसका अब अस्तित्व नहीं. इसे 1960 में स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय गवर्नर रहे राजगोपालाचारी ने गठित किया था. पीलू इसके संस्थापक सदस्यों में से एक थे. जयपुर की मशहूर गायत्री देवी भी इसी पार्टी के टिकट से सांसद बनी थीं. स्वतंत्र पार्टी बाजारवाद और खुलेपन की समर्थक थी. सरकारी नियंत्रण के बनिस्बत. इसे पूर्व रजवाड़ों और कारोबारी घरानों की पार्टी माना जाता था. इसी के टिकट पर पीलू गोधरा लोकसभा से 1967 एवं 1971 में संसद पहुंचे. 1978 में वह जनता पार्टी के टिकट पर राज्यसभा सदस्य चुने गए. लगभग 14 साल के संसदीय जीवन में पीलू ने संसद को अपनी समझ और व्यंग्य से खूब समृद्ध किया.

आइए जानें अब उनके कुछ मजेदर किस्से

मोदी से दशकों पहले टॉयलेट की बात

सत्तर के दशक के बीतने से पहले पीलू को समझ आ गया कि अब स्वतंत्र पार्टी के दिन पूरे हो चुके हैं. उन्होंने विपक्षी एकता के नाम पर चौधरी चरण सिंह की लोकदन में अपनी पार्टी का विलय कर दिया. उसके बाद एक रोज चौधरी के बंगले पर बात हुई. गांवों की जरूरतों के बारे में. चौधरी चरण सिंह फसल, ट्रैक्टर, यूरिया और सिंचाई की बात करने लगे. मगर पीलू बोले, हमें गांवों में बड़े पैमाने पर सार्वजनिक शौचालय बनाने चाहिए. चौधरी हंसने लगे और बोले, मोदी साहब, आप भी क्या बात ले आए. तब पीलू ने कहा, चौधरी साहब आप गाँवों में पले-बढ़े ज़रूर हैं लेकिन आपने एक बात पर गौर नहीं किया. पब्लिक टायलेट्स के अभाव में भारत की गरीब महिलाओं की शारीरिक बनावट में अंतर आ रहा है. ये उनकी सेहत के लिए बहुत ख़तरनाक हो सकता है. तब चौधऱी चरण सिंह को लगा कि ये तो बहुत गंभीर किस्म का आदमी है.

जब चौधरी चरण सिंह 1979 में प्रधानमंत्री बने, तब भी पीलू के तेवर अपने नेता के प्रति नहीं बदले. वह साफगोई बरतते रहे. एक बार तो एक बहस में उन्होंने चरण सिंह को कह दिया, आपके लिए तो हिंदुस्तान झांसी तक ही है. इसके आगे तो आपको पता ही नहीं है.

मैं परमानेंट पीएम, आप टेंपरेरी

पीलू और इंदिरा, राजनीतिक तौर पर विरोधी थे, मगर निजी जीवन में मित्र थे. इंदिरा संसद में दिए गए पीलू मोदी के किसी भी भाषण को मिस नहीं करती थीं. अकसर पीलू की स्पीच के बाद वह नोट भी भेजतीं, तारीफ से भरा. जाहिर है कि पीलू भी इसका जवाब देते. और पीएम को भेजी जवाबी स्लिप के आखिरी में लिखते पीएम. पीएम क्यों. क्योंकि ये पीलू मोदी का शॉर्ट फॉर्म था. पीलू कई बार इंदिरा के सामने भी कहते, “आई एम ए परमानेंट पीएम, यू आर ओनली टेंपेरेरी पीएम”. इंदिरा ये सुन मुस्कुरा देतीं

jansatta

जब पीएम ने दोस्त के लिए जेल में इंग्लिश संडास लगवाया

इमरजेंसी के दौर में बाकी विपक्षी नेताओं की तरह पीलू भी जेल में ठूंस दिए गए. उन्हें कैद किया गया रोहतक जेल में. अब जेल में इंडियन स्टाइल संडास था. मगर पीलू भारी भरकम शरीर वाले आदमी. उन्हें आदत थी इंग्लिश संडास यानी कमोड की. जिस पर बिना पैरों पर बल दिए बैठा जा सकता है. इसलिए रोहतक जेल में पीलू की बुरी हालत.  तभी एक रोज उन्हें इंदिरा की स्लिप मिली. किसी चीज की जरूरत तो नहीं. पीलू ने तकलीफ बताई. इंदिरा ने फौरन रोहतक जेल में वेस्टर्न कमोड लगवाने का आदेश दिया. इस आदेश की तामील की कहानी भी दिलचस्प है. पीएमओ से ऑर्डर के बाद जेल सुपरिटेंडेंट ने पूरा रोहतक छान मारा. मगर कहीं कमोड नहीं मिला. तब एक राज मिस्त्री ने मुश्किल सुलझाई. उन्होंने ईंट व सीमेंट से ही कमोड जैसा स्ट्रक्चर बना दिया. और तब जाकर पीलू की दिक्कत दूर हुई

पीलू जिंदगी को भरपूर जीते थे. और कई बार ऐसे लोगों के लिए जिंदगी कम पड़ जाती है. पीलू का 1983 के साल की शुरुआत में निधन हो गया. 57 साल की उम्र में. ठहाके ठहर गए संसद के गलियारों के.