Gattipally Shivpal: 3 फीट का ये शख्स बना बौने लोगों के लिए बड़ी मिसाल, Driving Licence से बनी नई पहचान...

 India First Dwarf to get Driving License  

 India First Dwarf to get Driving License  

जहां "बौना" (Dwarf) शब्द दुनियाभर में लोगों के बीच परिहास का कारण बना रहा है। वहीं, इससे एक शख्स को फायदा भी हुआ है। हैदराबाद (Hyderabad) से एक ऐसा किस्सा सामने आया है, जहां एक शख्स के बौने होने पर उसका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स (Limca Book of Records) समेत अन्य रिकॉर्ड में नामांकित हुआ है। ड्राइविंग लाइसेंस (driving license) लेने के बाद गट्टीपल्ली शिवपाल (Gattipally Shivpal) भारत के पहले बौन व्यक्ति (first dwarf person in India) बन गए है। इनके द्वारा ड्राइविंग लाइसेंस हासिल करने के बाद अन्य शारीरिक रूप से विकलांग (physically handicapped) लोगों को भी हिम्मत मिल सकती है।

आपको बता दें कि भारत में शारीरिक रूप से विकलांग लोगों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना इतना आसान काम नहीं है। हालांकि, 42 वर्षीय गट्टीपल्ली शिवपाल ने हर तरह की बाधाओं को हराते हुए ड्राइविंग लाइसेंस (first dwarf person awarded with driving licence) हासिल कर लिया है।

इस दुनिया में नामुमकिन कुछ भी नहीं है, अगर आप कुछ करने की ठान लो तो वो पूरा हो सकता है। इसका सीधा उद्धाहरण 3 फीट हाइट के शिवपाल हैं। बता दें कि इन्होंने कार चलाने के अलावा पढ़ाई में भी अपने जिले में पहले दिव्यांग की सूची में नाम शामिल किया है जिन्होंने डिग्री हासिल की है। शिवपाल अपने एक इंटरव्यू में कहा कि उनके लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सफर करना आसान नहीं था। ऐसे में इस परेशानी से छुटकारा पाने के लिए उन्होंने गाड़ी चलानी सिखी और ड्राइविंग लाइसेंस हासिल किया।

हालांकि, उनके लिए ड्राइविंग सिखना इतना आसान काम नहीं था। इस दौरान उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उनके कद का कई लोगों ने मजाक उड़ाया तो कुछ दिक्कतें गाड़ी सिखने के दौरान हुई। इन सबके बाद भी उन्होंने लाइसेंस हासिल कर ही लिया और अब वो देश के पहले बौने हैं जिन्होंने लाइसेंस हासिल किया है। इनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स समेत अन्य रिकॉर्ड में शामिल हो गया है।

देखा था एक अमेरिकी वीडियो 

बता दें कि शिवपाल ने एक वीडियो देखा जिसमें एक अमेरिका का बौना व्यक्ति कार चला रहा था। ये देखने के बाद वो अमेरिका गए और वहां उन्होंने तकनीकी जानकारी ली और पता लगाया कि किसी तरह से वो भी कार चलाना सीख सकते हैं। इसके बाद वो अपने भारत वापस आ गए।

कार कस्टमाइज के बाद सीखी ड्राइविंग

हैदराबाद आने के बाद उन्होंने एक कार को इस तरह से कस्टमाइज करवाया कि वो उनके लिए सही रहे और उनका पैर पैडल तक पहुंच सके। इसके बाद अपने उन्होंने कार सिखने के लिए लगभग 120 ड्राइविंग सेंटर से संपर्क किया, लेकिन सभी ने उन्हें गाड़ी सिखाने से मना कर दिया। ऐसे में उन्के एक दोस्त ने मदद कि और उन्हें कार चलानी सिखाई जिसके बाद उन्होंने लाइसेंस हासिल किया। वहीं, अब शिवपाल न केवल भारत के पहले बौन व्यक्ति बन गए हैं जिन्हें ड्राइविंग लाइसेंस हासिल हुआ, साथ ही अब उन से कई बौने व्यक्ति संपर्क कर गाड़ी चलाना सिखना चाहते हैं।