जानिए कैसे ‘माचिस की डिब्बी’ से जुड़े एक जवाब ने जनरल बिपिन रावत के लिए खोल दिए थे NDA के दरवाजें

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत का हेलिकॉप्टर क्रैश के दौरान निधन हो गया है. देश के सभी लोगों ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धाजंलि अर्पित की है. बता दें कि बिपिन रावत के साथ उनकी पत्नी भी मौजूद थी. जानकारी के मुताबिक, हेलीकॉप्टर में 14 लोग सवार थे जिसमें से 13 लोगों की मौत हो गई है. उनके देश प्रेम से हर कोई वाकिफ रहा है. हमेशा अनुशासित रहना, लक्ष्य तय करके उसे पूरा करना ये सब जनरल बिपिन रावत की खासियत रहीं हैं. बता दें कि उनके करियर की शुरूआत में माचिस की डिब्बी ने एक अहम रोल अदा किया है. आइए जानते हैं कि माचिस की डिब्बी से जुड़ी क्या है ये बात…


दरअसल, कुछ साल पहले इंडियन आर्मी में ऑफिसर बनने के लिए तैयारी कर रहें छात्रों को प्रेरित करने के लिए उन्होंने अपना व्यक्तिगत अनुभव बताया था. उन्होंने शुरूआती दौर के बारे में बताया कि, यूपीएससी की एनडीए परीक्षा क्वालिफाई करने के बाद हम सर्विस सेलेक्शन बोर्ड (एसएसबी) के पास गए. मुझे इलाहाबाद जाने के लिए कहा गया. यहां पर करीब चार से पांच दिनों की सख्त ट्रेनिंग और टेस्टिंग के बाद आखिरकार इंटरव्यू का समय आया और इंटरव्यू के लिए हम लाइन में खड़े थे. फिर धीरे-धीरे नंबर आया और नंबर के अनुसार हम अंदर गए.


अपने बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि, जब मेरी बारी आई तो मैं अंदर गया. सामने एक ब्रिगेडियर रैंक के ऑफिसर थे जो मेरा इंटरव्यू लेने वाले थे. दो-चार सवाल पूछने के बाद उन्होंने मेरी हॉबी पूछी. कई सारी हॉबी में मैंने ट्रैकिंग बताया. इसके बाद उन्होंने पूछा कि, यदि आपको ट्रैकिंग पर जाना हो जो कि चार से पांच दिन चलने वाली हो,तो आप एक सबसे महत्वपूर्ण सामान का नाम बताइए जो आप अपने पास रखना चाहेंगे.


उनकी ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में मैंने बताया कि, ऐसी परिस्थिति में मैं अपने पास माचिस की डिब्बी रखना चाहूंगा. अब सवाल ये उठ गया कि माचिस की डिब्बी ही क्यों? तब मैंने बताया कि अगर मेरे पास माचिस की डिब्बी है तो मैं ट्रैकिंग के दौरान इस एक चीज से कई काम कर सकता था और बहुत सारी गतिविधियों को अंजाम दे सकता था. बिपिन रावत ने कहा कि जब मनुष्य प्रारंभिक युग में आदिम अवस्था से आगे बढ़ा तो उन्होंने आग को खोज को सबसे अहम माना. मनुष्य ने इस खोज को अपनी कामयाबी माना. इसके बाद उन्होंने सवालों को घुमा कर पूछा लेकिन मैं माचिस की डिब्बी को लेकर अडिग रहा. इसके बाद पता चला कि मेरा सिलेक्शन हो गया है. बेशक आज जनरल बिपिन रावत हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी सीख हमेशा हमारे साथ रहेगी.